Wednesday, 1 March 2017

Rabindranath Tagore New Light Story in Hindi – नई रोशनी

Rabindranath Tagore New Light Story in HindiRabindranath Tagore New Light Story in Hindi



बाबू अनाथ बन्धु बी.ए. में पढ़ते थे। परन्तु कई वर्षों से निरन्तर फेल हो रहे थे। उनके सम्बन्धियों का विचार था कि वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण हो जाएंगेपर इस वर्ष उन्होंने परीक्षा देना ही उचित न समझा।


इसी वर्ष बाबू अनाथ बन्धु का विवाह हुआ था। भगवान की कृपा से वधू सुन्दर सद्चरित्रा मिली थी। उसका नाम विन्ध्यवासिनी था। किन्तु अनाथ बाबू को इस हिंदुस्तानी नाम से घृणा थी। पत्नी को भी वह विशेषताओं और सुन्दरता में अपने योग्य न समझते थे।

Rabindranath Tagore Wife's Letter Story in Hindi – पत्नी का पत्र

Rabindranath Tagore Wife's Letter Story in HindiRabindranath Tagore Wife's Letter Story in Hindi



श्रीचरणकमलेषु,


आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गएलेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही - न जाने कितनी बातें कहती सुनती रहीपर चिट्ठी लिखने लायक दूरी कभी नहीं मिली। आज मैं श्री क्षेत्र में तीर्थ करने आई हूँतुम अपने ऑफिस के काम में लगे हुए हो। कलकत्ता के साथ तुम्हारा वही संबंध है जो घोंघे के साथ शंख का होता है। वह तुम्हारे तन-मन से चिपक गया है। इसलिए तुमने ऑफिस में छुट्टी की दरख्वास्त नहीं दी। विधाता की यही इच्छा थी;उन्होंने मेरी छुट्टी की दरख्वास्त मंजूर कर ली। तुम्हारे घर की मझली बहू हूँ। पर आज पंद्रह वर्ष बाद इस समुद्र के किनारे खड़े होकर मैं जान पाई हूँ कि अपने जगत और जगदीश्वर के साथ मेरा एक संबंध और भी है। इसीलिए आज साहस करके यह चिट्ठी लिख रही हूँइसे तुम अपने घर की मझली बहू की ही चिट्ठी मत समझना!

Rabindranath Tagore Pashani Story in Hindi – पाषाणी

Rabindranath Tagore Pashani Story in HindiRabindranath Tagore Pashani Story in Hindi


अपूर्वकुमार बी.ए. पास करके ग्रीष्मावकाश में विश्व की महान नगरी कलकत्ता से अपने गांव को लौट रहा था। मार्ग में छोटी-सी नदी पड़ती है। वह बहुधा बरसात के अन्त में सूख जाया करती हैपरन्तु अभी तो सावन मास है। नदी अपने यौवन पर हैगांव की हद और बांस की जड़ों का आलिंगन करती हुई तीव्रता से बहती चली जा रही है लगातार कई दिनों की घनघोर बरसात के बाद आज तनिक मेघ छटे हैं और नभ पटल पर सूर्य देव के दर्शन हो रहे हैं।

Rabindranath Tagore Pinjar Story in Hindi –पिंजर

Rabindranath Tagore Pinjar Story in HindiRabindranath Tagore Pinjar Story in Hindi


जब मैं पढ़ाई की पुस्तकें समाप्त कर चुका तो मेरे पिता ने मुझे वैद्यक सिखानी चाही और इस काम के लिए एक जगत के अनुभवी गुरु को नियुक्त कर दिया। मेरा नवीन गुरु केवल देशी वैद्यक में ही चतुर न थाबल्कि डॉक्टरी भी जानता था। उसने मनुष्य के शरीर की बनावट समझाने के आशय से मेरे लिए एक मनुष्य का ढांचा अर्थात् हड्डियों का पिंजर मंगवा दिया था। जो उस कमरे में रखा गया,जहां मैं पढ़ता था। साधारण व्यक्ति जानते हैं कि मुर्दा विशेषत: हड्डियों के पिंजर सेकम आयु वाले बच्चों कोजब वे अकेले होंकितना अधिक भय लगता है।

Rabindranath Tagore Prem Ka Mulya Story in Hindi - प्रेम का मूल्य

Rabindranath Tagore Prem Ka Mulya Story in HindiRabindranath Tagore Prem Ka Mulya Story in Hindi

बृहस्पति छोटे देवतओं का गुरु था। उसने अपने बेटे कच को संसार में भेजा कि शंकराचार्य से अमर-जीवन का रहस्य मालूम करे। कच शिक्षा प्राप्त करके स्वर्ग-लोक को जाने के लिए तैयार था। उस समय वह अपने गुरु की पुत्री देवयानी से विदा लेने के लिए आया।


कच- ''देवयानीमैं विदा लेने के लिए आया हूं। तुम्हारे पिता के चरण-कमलों में मेरी शिक्षा पूरी हो चुकी है कृपा कर मुझे स्वर्ग-लोक जाने की आज्ञा दो।''

Tuesday, 28 February 2017

Rabindranath Tagore Panhandler Story in Hindi - भिखारिन

Rabindranath Tagore Panhandler Story in HindiRabindranath Tagore Panhandler Story in Hindi


अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होतीदर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- बाबूजीअन्धी पर दया हो जाए।


वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रध्दालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था। आने-जाने वाले दो-चार पैसे उसके हाथ पर रख ही देते। अन्धी उनको दुआएं देती और उनको सहृदयता को सराहती। स्त्रियां भी उसके पल्ले में थोड़ा-बहुत अनाज डाल जाया करती थीं।

Rabindranath Tagore This Freedom Story in Hindi - यह स्वतन्त्रता

Rabindranath Tagore This Freedom Story in HindiRabindranath Tagore This Freedom Story in Hindi

पाठक चक्रवर्ती अपने मुहल्ले के लड़कों का नेता था। सब उसकी आज्ञा मानते थे। यदि कोई उसके विरुध्द जाता तो उस पर आफत आ जातीसब मुहल्ले के लड़के उसको मारते थे। आखिरकार बेचारे को विवश होकर पाठक से क्षमा मांगनी पड़ती। एक बार पाठक ने एक नया खेल सोचा। नदी के किनारे एक लकड़ी का बड़ा लट्ठा पड़ा थाजिसकी नौका बनाई जाने वाली थी। पाठक ने कहा- ''हम सब मिलकर उस लट्ठे को लुढ़काएंलट्टे का स्वामी हम पर क्रुध्द होगा और हम सब उसका मजाक उड़ाकर खूब हंसेंगे।'' सब लड़कों ने उसका अनुमोदन किया।